Sunday, May 9, 2021

कहानी "सुखी जीवन का मंत्र"

शहर के चौराहे पर चिरंजी लाल की कपड़े की एक दुकान थी चिरंजी लाल बड़ी ही ईमानदारी के साथ अपने दुकान पर नियमित जाते और बहुत ही वाजिब मूल्यों पर अपने ग्राहकों को कपडे बेचा करते थे ! चिरंजी लाल अपने ग्राहकों के प्रति वफादार थे वह उनसे ठगी नहीं करते थे! इस प्रकार वह अपने घर का खर्च चलाते और कठिनाई से जीवन व्यतीत करते थे ! उनके पड़ोस में एक दूसरा दुकानदार जिसने अपने दुकान पर दो तीन नौकर भी रख रखे थे वह चिरंजी लाल से अधिक पैसा कमाता था ! चिरंजी लाल जब कभी अपने दुकान के लिए माल लेने बड़े व्यपारी के पास जाते तो वहाँ की चकाचौंध और बड़े व्यपारी की लग्जरी लाईफ देख कर मन ही मन परेशान हो जाते थे कि आखिर ऐसा क्या है जो मेरा पड़ोसी और यह व्यपारी इतने शान सौकत से जीवन जी रहे हैं और मैं अपनी दुकान से बड़ी मुस्किल से घर चला रहा हूँ ! इसी उधेड़बुन में चिरंजी लाल दिन रात मेहनत करते और अपने सभी करीबी मित्रों से इस प्रश्न का उत्तर जानने की कोशिश करते कि आखिर दूसरे व्यापारी इतना कैसे कमा लेते हैं?

एक दिन अपने इन मुश्किल भरे जीवन से परेशान चिरंजी लाल अपने दुकान पर उदास मन से बैठे थे, तभी बिजली विभाग के एक कर्मचारी जिन्हें लोग कुल्लू बाबू के नाम से जानते थे कुछ कपड़े लेने आए ! उनको आता देख चिरंजी लाल मुस्कुराने का नाटक करते हुए बोले आइए आइए कुल्लू बाबू कहिए क्या सेवा करूँ आपकी? कुल्लू बाबू बहुत ही पारखी नजरों वाले थे उन्होंने चिरंजी लाल के मुस्कुराहट के पीछे का दर्द देख लिया था ! उन्होंने कहा चिरंजी लाल भाई एक कुरते का कपड़ा लेना था, पहले मैं तुम्हारे पड़ोस की दुकान पर गया पर वह मामूली से कपडे का तीन गुना दाम माँग रहा है , जरा कुछ मेरे बजट में अच्छा सा दिखाओ ! आप तो सरकारी कर्मचारी हैं आपको पैसे की क्या कमी ऐसा कहते हुए चिरंजी लाल एक से कपड़े दिखाने लगे, कपड़े देखते देखते कुल्लू बाबू बोले भाई चिरंजी लाल तुम्हारे दुकान के सामने यह जो सब्जीवाल है न इसका घर मेरे मोहल्ले में है, पिछले दो सालों से उसे यही एक कुरता पहनते देख रहा हूँ, लेकिन इसके चेहरे पर कभी कोई उदासी नहीं देखी , कई बार मैंने इसकी आर्थिक मदद करनी चाही लेकिन यह मदद लेने को तैयार ही नहीं होता, कहता है "दुनिया में मुझसे भी गरीब लोग हैं मदद तो उनकी होनी चाहिए " यह रोज शाम को अपने बीबी बच्चों के साथ बड़ा ही खुश रहता है और फिर अगले दिन उतने ही उत्साह से अपने काम पर लग जाता है ! आज उसके शादी के वर्षगाँठ पर यह कुरता उसे भेट देना चाहता हूँ! 

कुल्लू बाबू की बातें सुनकर चिरंजी लाल बड़े ही आश्चर्य में पड गए, कुल्लू बाबू ने बिना कुछ कहे उन्हे सुखी जीवन का मंत्र समझा दिया था! कुरता लेकर कुल्लू बाबू घर चले गए! लेकिन अब तक चिरंजी लाल समझ चुके थे कि

"खुश रहना है तो अपने से नीचे स्तर पर जीवन यापन कर रहे लोगो को 

और दुखी रहना है तो अपने से ऊपर के स्तर पर जीवन यापन कर रहे लोगो को देखें"  

कुल्लू बाबू की यह शिक्षा हम सभी को अपने जीवन में जरुर उतारनी चाहिए !

नोट: यह कहानी सच्ची प्रेरणा पर आधरित है!

Saturday, May 8, 2021

एक कविता "कहते थे कुल्लू बाबू"

 कहते थे कुल्लू बाबू


सोचो अगर ना हुई रोशनी, कैसे होगा उजियारा।

बिजली अगर नहीं होगी, कैसे चमकेगा जग सारा।।


कैसे चलेगी आटा चक्की, कैसे रोटी खाओगे।

नहीं चेलगा पम्प अगर, कैसे तुम पानी पाओगे।।


बिन बिजल दिन सूना होगा, सूनी होगी काली रात।

हुआ नहीं यदि चार्ज कहीँ तो, कैसे होगी फोन से बात।।


बन्द पड़े होंगे कारखाने, हम किस ऑफिस जाएँगे।

काम नहीं होगा कुछ भी तो, कैसे खर्च चलाएंगे।।


दिन में बल्ब जला यदि हमने, व्यर्थ में बिजली खर्च किया।

गाँव नगर होगा अंधियारा, गर आदत ना छोड़ दिया।।


ऊर्जा संरक्षण न करके,  काट रहे हम सीढ़ी को।

यूँ ही व्यर्थ गवांया तो, क्या देंगे अगली पीढ़ी को।।


बिन बिजली जग सूना है, इस सत्य बात को मान लो तुम।

बिजली नहीं गवाएँगे यह, अपने मन में ठान लो तुम।।


हर दिन हो ऊर्जा संरक्षण, जो दिल की मैं सुन लूँ बाबू।

ऊर्जा से ही जीवन है, कहते थे कुल्लू बाबू।।



कुल्लू बाबू को समर्पित

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कहानी "सुखी जीवन का मंत्र"

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